तुलसीदास साहित्य | Collections

Author's Selected Works & Collections

कुल रचनाएँ: 5

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दोहावली

तुलसीदास कृत 'दोहावली' मुक्तक रचना है। इसमें 573 छंद हैं जिनमें 23 सोरठे व शेष दोहे संगृहित हैं।

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दोहावली - 1

श्रीसीतारामाभ्यां नम:
ध्यान
राम बाम दिसि जानकी लखन दाहिनी ओर ।ध्यान सकल कल्यानमय सुरतरु तुलसी तोर ॥
सीता लखन समेत प्रभु सोहत तुलसीदास ।हरषत सुर बरषत सुमन सगुन सुमंगल बास ॥
पंचबटी बट बिटप तर सीता लखन समेत ।सोहत तुलसीदास प्रभु सकल सुमंगल देत ॥
राम-नाम-जपकी महिमा
चित्रकूट सब दिन बसत प्रभु सिय ...

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तुलसीदास के लोकप्रिय दोहे

काम क्रोध मद लोभ की, जौ लौं मन में खान।तौ लौं पण्डित मूरखौं, तुलसी एक समान।।
तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुं ओर । बसीकरन इक मंत्र है परिहरू बचन कठोर।।
तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।।
दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान।तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट ...

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भलि भारत भूमि

भलि भारत भूमि भले कुल जन्मु समाजु सरीरु भलो लहि कै।करषा तजि कै परुषा बरषा हिम मारुत धाम सदा सहि कै॥जो भजै भगवानु सयान सोई तुलसी हठ चातकु ज्यों ज्यौं गहि कै।न तु और सबै बिषबीज बए हर हाटक कामदुहा नहि कै॥
- तुलसीदास
 

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तुलसी की चौपाइयां

किए चरित पावन परम प्राकृत नर अनूरूप।।जथा अनेक वेष धरि नृत्य करइ नट कोइ ।सोइ सोइ भाव दिखावअइ आपनु होइ न सोइ ।।
तुलसीदास की मान्यता है कि निर्गुण ब्रह्म राम भक्त के प्रेम के कारण मनुष्य शरीर धारण कर लौकिक पुरुष के अनूरूप विभिन्न भावों का प्रदर्शन करते हैं। नाटक में एक नट अर्थात् अभिनेता अनेक पात्र...

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तुलसीदास का जीवन परिचय