रैदास | Ravidas साहित्य | Collections

Author's Selected Works & Collections

कुल रचनाएँ: 5

Author Image

चल मन | रैदास के पद

चल मन! हरि चटसाल पढ़ाऊँ।। गुरु की साटी ग्यान का अच्छर, बिसरै तौ सहज समाधि लगाऊँ।।प्रेम की पाटी, सुरति की लेखनी,ररौ ममौ लिखि आँक लखाऊँ।।येहि बिधि मुक्त भये सनकादिक, ह्रदय बिचार प्रकास दिखाऊँ।।कागद कँवल मति मसि करि निर्मल,बिन रसना निसदिन गुन गाऊँ।।कहै रैदास राम भजु भाइ, संत राखि दे बहुरि न आऊँ।।
-...

पूरा पढ़ें...

रैदास के पद -2

ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै ।गरीब निवाजु गुसाईआ मेरा माथै छत्रु धरै ॥जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै ।नीचउ ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै ॥नामदेव कबीरू तिलोचनु सधना सैनु तरै ।कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सभै सरै ॥
- रैदास

पूरा पढ़ें...

रैदास के पद

अब कैसे छूटे राम रट लागी।प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी॥प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥प्रभु जी, तुम मोती, हम धागा जैसे सोनहिं मिलत सोहागा॥प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै 'रैदासा'॥

पूरा पढ़ें...

रैदास के दोहे

जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।
रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं।तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि।।
हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।दोऊ एकऊ दूजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा।।
कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पा...

पूरा पढ़ें...

रैदास की साखियाँ

हरि सा हीरा छाड़ि कै, करै आन की आस ।ते नर जमपुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। १ ।।
अंतरगति रार्चैँ नहीं, बाहर कथैं उदास ।ते नर जम पुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। २ ।।
रैदास कहें जाके ह्रदै, रहै रैन दिन राम ।सो भगता भगवंत सम, क्रोध न ब्यापै काम ।। ३
जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड मेँ बास ।प्रेम भगति सों...

पूरा पढ़ें...

रैदास | Ravidas का जीवन परिचय