गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali साहित्य | Collections

Author's Selected Works & Collections

कुल रचनाएँ: 6

Author Image

जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने | गीत

जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने, सरगम का घूँघट खोल दिया दो बोल सुने ये फूलों ने मौसम का घूँघट खोल दिया 
बुलबुल ने छेड़ा हर दिल को, फूलों ने छेड़ा आँखों को दोनों के गीतों ने मिलकर फिर शमा दिखाई लाखों को महफ़िल की मस्ती में आकर सब कोई अपनी सुना गए जब काली कोयल शुरू हुई, पंच...

पूरा पढ़ें...

स्वतंत्रता का दीपक


घोर अंधकार हो, चल रही बयार हो, आज द्वार द्वार पर यह दिया बुझे नहीं। यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है। शक्ति का दिया हुआ, शक्ति को दिया हुआ, भक्ति से दिया हुआ, यह स्‍वतंत्रता-दिया, रुक रही न नाव हो, जोर का बहाव हो, आज गंग-धार पर यह दिया बुझे नहीं! यह स्‍वदेश का दिया हुआ प्राण के सम...

पूरा पढ़ें...

कवि की बरसगाँठ

उन्तीस वसन्त जवानी के, बचपन की आँखों में बीते झर रहे नयन के निर्झर, पर जीवन घट रीते के रीते

          बचपन में जिसको देखा था           पहचाना उसे जवानी में       ...

पूरा पढ़ें...

मेरा धन है स्वाधीन कलम

राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन कलम मेरा धन है स्वाधीन कलम जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी उधार दिवा को दी पतवार थमा दी लहरों को ख़ंजर की धार हवा को दी अग-जग के उसी विधाता ने, कर दी मेरे आधीन कलम मेरा धन है स्वाधीन कलम रस-गंगा लहरा देती है मस्ती-ध्वज फहरा देती है चालीस करोड़ों की भोली किस्मत...

पूरा पढ़ें...

बरस-बरस पर आती होली

बरस-बरस पर आती होली,रंगों का त्यौहार अनूठाचुनरी इधर, उधर पिचकारी,गाल-भाल पर कुमकुम फूटालाल-लाल बन जाते काले,गोरी सूरत पीली-नीली,मेरा देश बड़ा गर्वीला,रीति-रसम-ऋतु रंग-रगीली,नीले नभ पर बादल काले,हरियाली में सरसों पीली !
-गोपाल सिंह नेपाली

पूरा पढ़ें...

हिंदी है भारत की बोली

दो वर्तमान का सत्‍य सरल,सुंदर भविष्‍य के सपने दोहिंदी है भारत की बोलीतो अपने आप पनपने दो
यह दुखड़ों का जंजाल नहीं,लाखों मुखड़ों की भाषा हैथी अमर शहीदों की आशा,अब जिंदों की अभिलाषा हैमेवा है इसकी सेवा में,नयनों को कभी न झंपने दोहिंदी है भारत की बोलीतो अपने आप पनपने दो
क्‍यों काट रहे ...

पूरा पढ़ें...

गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali का जीवन परिचय