जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने, सरगम का घूँघट खोल दिया दो बोल सुने ये फूलों ने मौसम का घूँघट खोल दिया
बुलबुल ने छेड़ा हर दिल को, फूलों ने छेड़ा आँखों को दोनों के गीतों ने मिलकर फिर शमा दिखाई लाखों को महफ़िल की मस्ती में आकर सब कोई अपनी सुना गए जब काली कोयल शुरू हुई, पंच...
घोर अंधकार हो, चल रही बयार हो, आज द्वार द्वार पर यह दिया बुझे नहीं। यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है। शक्ति का दिया हुआ, शक्ति को दिया हुआ, भक्ति से दिया हुआ, यह स्वतंत्रता-दिया, रुक रही न नाव हो, जोर का बहाव हो, आज गंग-धार पर यह दिया बुझे नहीं! यह स्वदेश का दिया हुआ प्राण के सम...
राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन कलम मेरा धन है स्वाधीन कलम जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी उधार दिवा को दी पतवार थमा दी लहरों को ख़ंजर की धार हवा को दी अग-जग के उसी विधाता ने, कर दी मेरे आधीन कलम मेरा धन है स्वाधीन कलम रस-गंगा लहरा देती है मस्ती-ध्वज फहरा देती है चालीस करोड़ों की भोली किस्मत...
बरस-बरस पर आती होली,रंगों का त्यौहार अनूठाचुनरी इधर, उधर पिचकारी,गाल-भाल पर कुमकुम फूटालाल-लाल बन जाते काले,गोरी सूरत पीली-नीली,मेरा देश बड़ा गर्वीला,रीति-रसम-ऋतु रंग-रगीली,नीले नभ पर बादल काले,हरियाली में सरसों पीली !
-गोपाल सिंह नेपाली
दो वर्तमान का सत्य सरल,सुंदर भविष्य के सपने दोहिंदी है भारत की बोलीतो अपने आप पनपने दो
यह दुखड़ों का जंजाल नहीं,लाखों मुखड़ों की भाषा हैथी अमर शहीदों की आशा,अब जिंदों की अभिलाषा हैमेवा है इसकी सेवा में,नयनों को कभी न झंपने दोहिंदी है भारत की बोलीतो अपने आप पनपने दो
क्यों काट रहे ...