अब तो हरि नाम लौ लागी
सब जग को यह माखनचोर, नाम धर्यो बैरागी।कहं छोडी वह मोहन मुरली, कहं छोडि सब गोपी।मूंड मुंडाई डोरी कहं बांधी, माथे मोहन टोपी।मातु जसुमति माखन कारन, बांध्यो जाको पांव।स्याम किशोर भये नव गोरा, चैतन्य तांको नांव।पीताम्बर को भाव दिखावै, कटि कोपीन कसै।दास भक्त की दासी मीरा, रसना कृ...
राम रतन धन पायो
पायो जी म्हे तो रामरतन धन पायो।बस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा को अपणायो।जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढत सवायो।सत की नाव खेवहिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।मीरा के प्रभु गिरधरनागर, हरख-हरख जस पायो॥
- मीरा
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हरि बिन कछू न सुहावै
परम सनेही राम की नीति ओलूंरी आवै।राम म्हारे हम हैं राम के, हरि बिन कछू न सुहावै।आवण कह गए अजहुं न आये, जिवडा अति उकलावै।तुम दरसण की आस रमैया, कब हरि दरस दिलावै।चरण कंवल की लगनि लगी नित, बिन दरसण दुख पावै।मीरा कूं प्रभु दरसण दीज्यौ, आंणद बरण्यूं न जावै॥
- मीरा
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अब तो मेरा राम
अब तो मेरा राम नाम दूसरा न कोई॥माता छोडी पिता छोडे छोडे सगा भाई।साधु संग बैठ बैठ लोक लाज खोई॥सतं देख दौड आई, जगत देख रोई।प्रेम आंसु डार डार, अमर बेल बोई॥मारग में तारग मिले, संत राम दोई।संत सदा शीश राखूं, राम हृदय होई॥अंत में से तंत काढयो, पीछे रही सोई।राणे भेज्या विष का प्याला, पी...
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।घायल की गति घायल जाणै जो कोई घायल होय।जौहरि की गति जौहरी जाणै की जिन जौहर होय। सूली ऊपर सेज हमारी सोवण किस बिध होय।गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय।दरद की मारी बन-बन डोलूं बैद मिल्या नहिं कोय।मीरा की प्रभु पीर मिटेगी जद बैद सांवरिया होय।
- म...
श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया ।। टेर ।।
ऐसी वो रंग दे रंग नाई छूटे, धोबनिया धोये चाहे सारी उमरिया।
बिना रंगाये बाहर ना जाऊँ, चाहे तो बीत जाए सारी उमरिया।
लाल न ओढूँ पीली न ओढूँ, ओढूँगी श्याम तेरी काली कमलिया।
गागर जो भर दे, सिर पे जो धर दे, चलके बता दे श्याम तेरी नगरिया।
बाई मीरा कहे गिरधर ...
अब तो हरि नाम लौ लागी
सब जग को यह माखनचोर, नाम धर्यो बैरागी।कहं छोडी वह मोहन मुरली, कहं छोडि सब गोपी।मूंड मुंडाई डोरी कहं बांधी, माथे मोहन टोपी।मातु जसुमति माखन कारन, बांध्यो जाको पांव।स्याम किशोर भये नव गोरा, चैतन्य तांको नांव।पीताम्बर को भाव दिखावै, कटि कोपीन कसै।दास भक्त की दासी मीरा, रसना कृ...
फागुन के दिन चार होली खेल मना रे॥
बिन करताल पखावज बाजै अणहदकी झणकार रे।बिन सुर राग छतीसूं गावै रोम रोम रणकार रे॥
सील संतोखकी केसर घोली प्रेम प्रीत पिचकार रे।उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग अपार रे॥
घटके सब पट खोल दिये हैं लोकलाज सब डार रे।मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरणकंवल बलिहार रे॥
-मीरा