भलि भारत भूमि भले कुल जन्मु समाजु सरीरु भलो लहि कै।करषा तजि कै परुषा बरषा हिम मारुत धाम सदा सहि कै॥जो भजै भगवानु सयान सोई तुलसी हठ चातकु ज्यों ज्यौं गहि कै।न तु और सबै बिषबीज बए हर हाटक कामदुहा नहि कै॥
- तुलसीदास