ज़रा उदासियों का मौसम, बदल के तो देखो
कुछ कदम तो मेरे साथ, तुम चल के तो देखो

उतर जायेगा बोझ सारा, तेरे दिल का अय यारा,
अपनी हसरतों को थोड़ा सा, बदल के तो देखो

यूं ही अंधेरों के दरमियां, बनाते क्यों हो तस्वीरें,
ज़रा दुनिया के उजालों में, निकल के तो देखो

ये पत्थर भी टूट जाते हैं, मोहब्बत की तपिश से,
ज़रा सा मोहब्बत के नाम से, पिघल के तो देखो

हमको तो है यक़ीन, तुम्हारी लियाक़तों पर दोस्त,
ज़रा ख्वाबों से थकी आँखों को, मसल के तो देखो

बहुत चल लिए तुम, ख़ारों से भरी राहों पे "मिश्र",
गर पानी हैं खुशियों, तो रस्ता बदल के तो देखो

- शांती स्वरुप मिश्र
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