माओरी समाज की पौराणिक कहानी के मुताबिक न्यूजीलैंड, जिसे माओरी लोग आओटियारोआ कहते हैं। इसकी तलाश कुपे नाम के एक मछुआरे ने रंगातिरा नाम के एक जनजातीय मुखिया के साथ मिलकर की थी। ये लोग टापू के रहने वाले थे। कुपे के मछली मारने के ठिकानों पर ऑक्टोपस हमला कर रहे थे। वो मछलियों को फंसाने के लिए डाला गया चोगा खा जाते थे।

मछुआरों को शंका हुई कि ये ऑक्टोपस दूसरी जनजाति के मुखिया मुतुरांगी के हैं।

कुपे ने मुतुरांगी से कहा कि वह अपने पालतू ऑक्टोपस को उसका मछलियों को फांसने वाला चोगा खाने से रोके। मुतुरांगी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, इसपर क्रोधित कुपे ने उस ऑक्टोपस को मार डालने की शपथ ले ली। वो अपना घर-बार छोड़कर ऑक्टोपस की खोज में निकल पड़ा। प्रशांत महासागर में ऑक्टोपस की तलाश के दौरान ही कुपे न्यूजीलैंड के द्वीपों पर जा पहुंचा। वहां कुपे और रंगातिरा उतरे और अपनी नाव पर खानपान की चीजें रखीं। इसके बाद ऑक्टोपस से कुपे और रंगातिरा की भयंकर समुद्री युद्ध हुआ।

माओरी लोक साहित्य के अनुसार ये लड़ाई आज की कुक जलसंधि पर हुई थी। आख़िरकार कुपे ने मुतुरांगी के पालतू ऑक्टोपस को मारने में कामयाबी हासिल कर ही ली। इस जीत के बाद कुपे ने न्यूजीलैड के उत्तरी द्वीप का चक्कर लगाया और कई ठिकाने का नामकरण किया। कुपे ने शपथ ली कि वह अपनी तलाश की हुई इस नई जमीन पर दोबारा कदम नहीं रखेगा। इस लोक कथा के अनुसार न्यूजीलैंड पर कदम रखने वाला पहला व्यक्ति कुपे था।


भावानुवाद : रोहित कुमार 'हैप्पी'
न्यूज़ीलैंड