रास्ते में बचेझुलस गये पिताघर में आ के
अनाथ बच्चाभर रहा कॉलमस्थायी पते का
चिता का धुआँपल में उड़ गयाइंसां का अहं
बड़े बंगलेहरे भरे गमलेमुरझाई माँ
मना ले आयेनाराज समधी कोमाँ के गहने
-अभिषेक कुमार, भारत