जब यार देखा नैन भर, दिल की गई चिंता उतर, 
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाय कर। 

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया, 
हक़्क़ा इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर। 

तूँ तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है, 
तुझ दोस्ती बिसियार है, एक शब मिलो तुम आय कर। 

जाना तलब तेरी करूँ, दीगर तलब किसकी करूँ, 
तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर। 

मेरो जो मन तुम ने लिया, तुम उठा ग़म को दिया, 
तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर। 

ख़ुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब, 
क़ुदरत ख़ुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर। 

-अमीर ख़ुसरो