दिन भर चलते-चलते थककर
सूरज जब छुप जाता है 
रात की काली चादर पर 
अंबर दीप जलाता है। 

जगमग करते असंख्य तारे
हाथ पकड़कर आते हैं
आंखमिचौली करते छत पर
कभी दिखते, कभी छुप जाते हैं।

राह कोई भी चलें हम
पथ-प्रदर्शन  करते हैं,
नैसर्गिक सौंदर्य लिए
आसमान पर खिलते हैं। 

-डॉ कुमारी स्मिता
 भारत