उधर गगन में सूरज की बिंदी नीले नभ में तैरते बादलबादलों के बीच उड़ते परिंदे। इधर झील मेंखिले कमल मंद पवन निश्चल बन निहारती केवल मौनता कोई रच गया निःशब्द कविता।
-डॉ अनीता शर्मा, चीन