हृदय को संवेदना की
कसौटी पर कसेंगी
कुछ रहे न रहे
      कविताएँ रहेंगी।
 
मेरी-तेरी, इसकी-उसकी, 
मुलाकातें, जग की बातें,
जगकर्ता के क़िस्से कहेंगी
कुछ  रहे न रहे
        कविताएँ रहेंगी। 
 
भागते हुए
वक़्त की चरितावली
संघर्ष की व्यथा-कथा
विकास की विरुदावली
कभी शांति की
संहिता रचेंगी
कुछ  रहे न रहे
      कविताएँ रहेंगी।
 
- अनुपमा श्रीवास्तव 'अनुश्री'
  ई-मेल : ashri0910@gmail.com