बचपन में एक दिन
सोया था, दादा के साथ
अचानक आधी रात को
कुत्ते भौंक रहे थे,
कुत्तों की आवाज़ से
मैं जग गया था
उस वक्त दादा ने बताया था—
जब कोई अशुभ घटना घटती हैं
कुत्ते रात को रोते हैं
कुकुर का रोना ठीक नहीं है।
तब लगा था कि—
दादा की बातों में
अंधविश्वास की गंध है,
मगर अब जाना
बड़े-बुजुर्गों की बातों में
बहुत सत्यता होती है।
प्राकृतिक आपदाओं के
संकेतक होते हैं, पशु-पक्षी
घ्राण शक्तियों से
समझते हैं, वे सारी बातें।
- नेतलाल यादव
ई-मेल : netlaly@gmail.com