मेरे अधिकार तो छीन लिए तुमने
मेरे जैसा हुनर कहाँ से लाओगे?
बोलो साहस इतना तुम, भला कहाँ से पाओगे!
दुर्योधन सा सिंहासन है मिला
युद्धिष्ठर से पूजनीय तुम कैसे कहलाओगे?

हमारे अंदर ज्ञान का लौ आलोकित है
अंधेरो से न हम घबराएंगे।
फ़िक्र तुम अपनी करो ऐ जाने जां
खैरात की चांदनी में कब तक नहाओगे?
अमावस की काली रातों में
तुम औंधे मुह गिर जाओगे।

मेरे अधिकार तो छीन लिए तुमने
मेरे जैसा हुनर कहाँ से लाओगे?

- प्रियांशु शेखर
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