एक साहित्य गोष्ठी में जितने थे सब किसी न किसी ‘वाद' के वादी ‘थे'। गोष्टी खत्म हुई तो एक ने पूछा,"जो सबसे ज्यादा बोले वह कौन थे?" दूसरे ने धीरे से कहा, वह इलाहावादी थे !"
- निशिकांत[गुदगुदी]