वो कभी दर्द का...

रचनाकार: ज्ञानप्रकाश विवेक | Gyanprakash Vivek

वो कभी दर्द का चर्चा नहीं होने देता
अपने जख्मों का वो जलसा नहीं होने देता

मेरे आंगन में गिरा देता है पत्ते अक्सर
पेड़ मुझको कभी तन्हा नहीं होने देता

इतना पेचीदा है ये वक्त हमारा यारो!
किसी बच्चे को भी बच्चा नहीं रहने देता

नुक्ताचीं कोई चला आए अगर महफिल में
फिर वो माहौल को अच्छा नहीं होने देता

मेरे अंदर भी है छोटा-सा मुसाफिरखाना
जो किसी शख्स को तन्हा नहीं होने देता

- ज्ञानप्रकाश विवेक