वो कभी दर्द का चर्चा नहीं होने देता
अपने जख्मों का वो जलसा नहीं होने देता
मेरे आंगन में गिरा देता है पत्ते अक्सर
पेड़ मुझको कभी तन्हा नहीं होने देता
इतना पेचीदा है ये वक्त हमारा यारो!
किसी बच्चे को भी बच्चा नहीं रहने देता
नुक्ताचीं कोई चला आए अगर महफिल में
फिर वो माहौल को अच्छा नहीं होने देता
मेरे अंदर भी है छोटा-सा मुसाफिरखाना
जो किसी शख्स को तन्हा नहीं होने देता
- ज्ञानप्रकाश विवेक