जीवन और संसार पर दोहे

रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

आँखों से बहने लगी, गंगा-जमुना साथ ।
माँ ने पूछा हाल जो, सर पर रख कर हाथ ।।

जिस्मों में तो जां नहीं, न चेहरों पर रंग ।
देख जवानी आज की, हुआ बुढ़ापा दंग ।।

जीवन को समझा नहीं, ‘रोहित' यह संसार ।
यह जीवन तो मौत ने, हमको दिया उधार ।।

जीवन में करने लगे, ‘रोहित' सभी दुकान ।
मोल-भाव में खो गया, हर इक का ईमान ।।

राँझा तो राँझा नहीं, मिले कहाँ से हीर ।
अब दिल में बसती नहीं, मीरा वाली पीर ।।

तेरा-मेरा कर रहा, ‘रोहित' यह संसार ।
चार दिनों की जिंदगी, आठ दिनों का बैर ।।

- रोहित कुमार ‘हैप्पी'