कंकड चुनचुन महल उठाया लोग कहें घर मेरा। ना घर मेरा ना घर तेरा चिड़िया रैन बसेरा है॥
जग में राम भजा सो जीता । कब सेवरी कासी को धाई कब पढ़ि आई गीता । जूठे फल सेवरी के खाये तनिक लाज नहिं कीता ॥
- कबीर