ऐसा लबालब क्यों भर दिया तूने,बोलता हूँ तोचर्चा होती है,चुप रहता हूँ तोऔर भी अधिकचर्चा होती है!
संजय भारद्वाज, पुणे ई-मेल: writersanjay@gmail.com