उलाहना

रचनाकार: सआदत हसन मंटो | Saadat Hasan Manto

"देखो यार। तुम ने ब्लैक मार्केट के दाम भी लिए और ऐसा रद्दी पेट्रोल दिया कि एक दुकान भी न जली।"

--मंटो