एक आदमी था। उसके पास सुइयों का इतना भण्डार था कि एक घाटी उनसे भर जाए।
एक दिन यीशु की माँ उसके पास आई और बोली, "मित्र! मेरे बेटे के कपड़े फट गए हैं। उसके मंदिर जाने को तैयार होने से पहले मुझे उन्हें सुई से टांकना है। क्या आप मुझे एक सुई देंगे?"
उसने उसे सुई तो नहीं दी लेकिन 'लेनदेन' पर एक विद्वत्तापूर्ण प्रवचन अवश्य दिया। उसने सुझाव दिया कि वह अपने बेटे को मंदिर जाने से पहले उसका व्याख्यान अवश्य सुनाए।
-खलील जिब्रान
[On Giving and Taking, The Madman: His Parables and Poems by Kahlil Gibran]
भावानुवाद - रोहित कुमार 'हैप्पी'