सूरज दादा कहाँ गए तुम

रचनाकार: आनन्द विश्वास | Anand Vishvas

सूरज दादा कहाँ गए तुम,
काहे ईद का चाँद भए तुम।

घना अँधेरा, काला - काला,
दिन निकला पर नहीं उजाला।

कोहरे ने कोहराम मचाया,
पारा गिर कर नीचे आया।

काले बादल जिया डराते, 
हॉरर-शो सा दृश्य दिखाते।

बर्षा रानी आँख दिखाती,
झम झम झम पानी बरसाती।

काले - काले बादल आते, 
उमड़-घुमड़ कर शोर मचाते।

नन्हीं - नन्हीं बूँद कभी तो,
कभी ज़ोर की बारिश लाते।

सर्द हवाएँ, शीत लहर है, 
बे-मौसम बरसात, कहर है।

*टच मी नॉट * कहे अब पानी, 
बाहर ना जा कहती नानी।

कट - कट दाँत बजाते बाजा,
मौसम अपना बैण्ड बजाता।

सड़क, गली, कुँचे, चौबारे,
सब सूने हैं ठंड के मारे।

फुट - पाथी, बेघर, बेचारे,
इन सबके तो तुम्हीं सहारे।

अब तो सुन लो, सूरज दादा,
कल आने का दे दो वादा।

- आनन्द विश्वास