सुख मिला :उसे हम कह न सके।दुख हुआ :उसे हम सह न सके।संस्पर्श बृहत् का उतरा सुरसरि-सा :हम बह न सके ।यों बीत गया सब : हम मरे नहीं, पर हाय कदाचित्जीवित भी हम रह न सके।
- अज्ञेय