भगत सिंह - गीत

रचनाकार: भारत-दर्शन संकलन | Collections

फांसी का झूला झूल गया मर्दाना भगत सिंह ।
दुनियां को सबक दे गया मस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


राजगुरु से शिक्षा लो दुनिया के नवयुवको ।
सुखदेव को पूछो कहां मस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


रोशन कहां, अशफाक और लहरी, कहां बिसमिल ।
आजाद से था सच्चा दोस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


स्वागत को वहां देवगण में इन्द्र के होंगे ।
परियां भी गाती होंगी यह तराना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


दुनियां को हरएक चीज को हम भूल क्यूं न जायें ।
भूले न मगर दिल से मुस्कराना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


भारत के पत्ते पत्ते में सोने से लिखेगा ।
राजगुरु, सुखदेव और मस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी ।


ऐ हिन्दियों सुनलो जरा हिम्मत करो दिल में।
बनना पड़ेगा सबको अब दीवाना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


- अज्ञात

[ शहीदों की यादगारी से ]