आज वह रोयायह सोचते हुए कि रोनाकितना हास्यास्पद हैवह रोया
मौसम अच्छा थाधूप खिली हुईसब ठीक-ठाकसब दुरुस्तबस खिड़की खोलते हीसलाखों से दिख गयाज़रा-सा आसमानऔर वह रोया
फूटकर नहींजैसे जानवर रोता है माँद मेंवह रोया।
- केदारनाथ सिंह
मेरे बेटेकुँए में कभी मत झाँकनाजानापर उस ओर कभी मत जानाजिधर उड़े जा रहें होंकाले-काले कौए
हरा पत्ताकभी मत तोड़नाऔर अगर तोड़ना तो ऐसेकि पेड़ को जरा भीन हो पीड़ा
रात को रोटी जब भी तोड़नातो पहले सिर झुकाकरगेहूँ के पौधे को याद कर लेना
अगर कभी लाल चींटियाँदिखाई पड़ेंतो समझनाआँधी आने वाली हैअगर कई-क...
विषय कुछ और थाशहर कोई औरपर मुड़ गई बात भिखारी ठाकुर की ओर और वहाँ सब हैरान थे यह जानकरकि पीते नहीं थे वेक्योंकि सिर्फ़ वे नाचते थेऔर खेलते थे मंच पर वे सारे खेलजिन्हें हवा खेलती है पानी सेया जीवन खेलता हैमृत्यु के साथ
इस तरह सरजू के कछार-साएक सपाट चेहरानाचते हुए बन जाता थाकभी घोर पियक्कड़कभ...