दादू दुनिया दीवानी, पूजे पाहन पानी।गढ़ मूरत मंदिर में थापी, निव निव करत सलामी।चन्दन फूल अछत सिव ऊपर बकरा भेट भवानी।छप्पन भोग लगे ठाकुर को पावत चेतन न प्रानी।धाय-धाय तीरथ को ध्यावे, साध संग नहिं मानी।ताते पड़े करम बस फन्दे भरमें चारों खानी।बिन सत्संग सार नहिं पावै फिर-फिर भरम...
इसक अलाह की जाति है, इसक अलाह का अंग। इसक अलाह औजूद है, इसक अलाह का रंग।।
घीव दूध में रमि रह्या सबही ठौर। दादू बकता बहुत है, मथि काढैं ते और।।
कहैं लखैं सो मानवी, सैन लखै सो साध। मन की लखै सु देवता, दादू अगम अगाध।।
आसिक मासूक ह्वै गया, इसक कहावै सोइ। दादू उस मासूक का, अल्लाह आसिक होर्इ।।
मिश्...