माखनलाल चतुर्वेदी साहित्य | Collections

Author's Selected Works & Collections

कुल रचनाएँ: 4

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लड्डू ले लो | बाल-कविता

ले लो दो आने के चारलड्डू राज गिरे के यारयह हैं धरती जैसे गोलढुलक पड़ेंगे गोल मटोलइनके मीठे स्वादों में हीबन आता है इनका मोलदामों का मत करो विचारले लो दो आने के चार।
लोगे खूब मज़ा लायेंगेना लोगे तो ललचायेंगेमुन्नी, लल्लू, अरुण, अशोकहँसी खुशी से सब खायेंगेइनमें बाबू जी का प्यारले लो दो आने के चार।...

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पुष्प की अभिलाषा | कविता

चाह नहीं मैं सुरबाला के,गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव,पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!
मुझे तोड़ लेना वनमाली!उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ानेजिस पथ जाएँ वीर अनेक।
- माखनलाल च...

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मेंहदी से तस्वीर खींच ली

मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।प्राणों की लाली-सी है यह, मिट मत जायहाथों में रसदान किये यह, छुट मत जाययह बिगड़ी पहचान कहीं कुछ बन मत जायरूठन फिसलन से मन चाही मन मत जाय!बेच न दो विश्वास-साँस को, उस मुस्कान अधेली पर!मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।हाथों पर लिख रक्खा ह...

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दीप से दीप जले

सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलें,कर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें।
लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने मेंलक्ष्मी बँट-बँट बढ़ती आने-जाने में,लक्ष्मी का आगमन अँधेरी रातों मेंलक्ष्मी श्रम के साथ घात-प्रतिघातों में,लक्ष्मी सर्जन हुआकमल के फूलों मेंलक्ष्मी-पूजन सजे नवीन दुकूलों में।
गिरि, वन, नद-सागर, ...

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माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन परिचय