मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला;पहले भोग लगा लूँ तेरा, फिर प्रसाद जग पाएगा; सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला। ।१।
प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला, एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला;जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब ...
जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिलाकुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँजो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला।
जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखामैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में,हर एक यहाँ पर एक भुलाने में भूलाहर एक लगा है अपनी अपनी दे-ले मेंकुछ देर रहा हक्का-बक्का, भौचक्का-सा,आ गया कहाँ, क्या ...
साथी, नया वर्ष आया है!वर्ष पुराना, ले, अब जाता,कुछ प्रसन्न सा, कुछ पछताता,दे जी-भर आशीष, बहुत ही इससे तूने दुख पाया है!साथी, नया वर्ष आया है!
उठ इसका स्वागत करने को,स्नेह-बाहुओं में भरने को,नए साल के लिए, देख, यह नई वेदनाएँ लाया है!साथी, नया वर्ष आया है!
उठ, ओ पीड़ा के मतवाले,ले ये तीक्ष्ण-तिक्...
चिड़िया, ओ चिड़िया,कहाँ है तेरा घर?उड़-उड़ आती हैजहाँ से फर-फर!
चिड़िया, ओ चिड़िया,कहाँ है तेरा घर?उड़-उड़ जाती है-जहाँ को फर-फर!
वन में खड़ा है जोबड़ा-सा तरुवर,उसी पर बना हैखर-पातों वाला घर!
उड़-उड़ आती हूँवहीं से फर-फर!उड़-उड़ जाती हूँवहीं पर फर-फर!
- हरिवंशराय बच्चन
जीवन में एक सितारा थामाना वह बेहद प्यारा थावह डूब गया तो डूब गयाअंबर के आनन को देखोकितने इसके तारे टूटेकितने इसके प्यारे छूटेजो छूट गए फिर कहाँ मिलेपर बोलो टूटे तारों परकब अंबर शोक मनाता हैजो बीत गई सो बात गई
जीवन में वह था एक कुसुमथे उस पर नित्य निछावर तुमवह सूख गया तो सूख गयामधुबन की छाती को द...
नव वर्षहर्ष नवजीवन उत्कर्ष नव।
नव उमंग,नव तरंग,जीवन का नव प्रसंग।
नवल चाह,नवल राह,जीवन का नव प्रवाह।
गीत नवल,प्रीति नवल,जीवन की रीति नवल,जीवन की नीति नवल,जीवन की जीत नवल!
- हरिवंश राय बच्चन
[सतरंगिनी]
फ़ादर बुल्के तुम्हें प्रणाम!जन्मे और पले योरुप मेंपर तुमको प्रिय भारत धामफ़ादर बुल्के तुम्हें प्रणाम!
रही मातृभाषा योरुप कीबोली हिन्दी लगी ललामफ़ादर बुल्के तुम्हें प्रणाम!
ईसाई संस्कार लिए भीपूज्य हुए तुमको श्रीरामफ़ादर बुल्के तुम्हें प्रणाम!
तुलसी होते तुम्हें पगतरीके हित देते अपना चामफ़ादर ब...
मुन्नी और चुन्नी में लाग-डाट रहती है । मुन्नी छह बर्ष की है, चुन्नी पाँच की । दोनों सगी बहनें हैं । जैसी धोती मुन्नी को आये, वैसी ही चन्नी को । जैसा गहना मुन्नी को बने, वैसा ही चुन्नी को । मुन्नी 'ब' में पढ़ती थीँ, चुन्नी 'अ' में । मुन्नी पास हो गयी, चुन्नी फ़ेल । मुन्नी ने माना था कि मैं पास हो ज...
मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर,अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धरऔर दिशाओं से प्रतिध्वनियाँ, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं,कान तुम्हारे तान कहीं से यदि सुन पाते, तब क्या होता?
तुमने कब दी बात रात के सूने में तुम आने वाले,पर ऐसे ही वक्त प्राण मन, मेरे हो उठते मतवाले,साँसें ...
हो जाय न पथ में रात कहीं,मंज़िल भी तो है दूर नहीं -यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!
बच्चे प्रत्याशा में होंगे,नीड़ों से झाँक रहे होंगे -यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!
मुझसे मिलने को कौन विकल?मैं होऊं किसके हित चं...
इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए,कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गँवाए!किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
जय बोलो उस धीर व्...
निराला के देहांत के पश्चात् उनके मृत शरीर का चित्र देखने पर हरिवंशराय बच्चन की लिखी कविता - मरा मैंने गरुड़ देखा, गगन का अभिमान, धराशायी,धूलि धूसर, म्लान! मरा मैंने सिंह देखा, दिग्दिगंत दहाड़ जिसकी गूँजती थी, एक झाड़ी में पड़ा चिर-मूक, दाढ़ी-दाढ़-चिपका थूक। मरा मैंने सर्प देखा, स्फूर्ति का प्र...
साथी, घर-घर आज दिवाली!
फैल गयी दीपों की मालामंदिर-मंदिर में उजियाला,किंतु हमारे घर का, देखो, दर काला, दीवारें काली!साथी, घर-घर आज दिवाली!
हास उमंग हृदय में भर-भरघूम रहा गृह-गृह पथ-पथ पर,किंतु हमारे घर के अंदर डरा हुआ सूनापन खाली!साथी, घर-घर आज दिवाली!
आँख हमारी नभ-मंडल पर,वही हमारा नीलम का घर,...
"हमारी तो कभी शादी ही न हुई,न कभी बारात सजी,न कभी दूल्हन आई,न घर पर बधाई बजी,हम तो इस जीवन में क्वांरे ही रह गए।"
दूल्हन को साथ लिए लौटी बारात कोदूल्हे के घर पर लगाकर,एक बार पूरे जोश, पूरे जोर-शोर सेबाजों को बजाकर,आधी रात सोए हुए लोगों को जगाकरबैंड बिदा हो गया।
अलग-अलग हो चल...
आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ
है कहाँ वह आग जो मुझको जलाए,है कहाँ वह ज्वाल मेरे पास आए,
रागिनी, तुम आज दीपक राग गाओ,आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ।
तुम नई आभा नहीं मुझमें भरोगी,नव विभा में स्नान तुम भी तो करोगी,
आज तुम मुझको जगाकर जगमगाओ,आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ।
मैं तपोमय ज्योति की, पर, प्...
आज से आजाद अपना देश फिर से!
ध्यान बापू का प्रथम मैंने किया है,क्योंकि मुर्दों में उन्होंने भर दिया हैनव्य जीवन का नया उन्मेष फिर से!आज से आजाद अपना देश फिर से!
दासता की रात में जो खो गये थे,भूल अपना पंथ, अपने को गये थे,वे लगे पहचानने निज वेश फिर से!आज से आजाद अपना देश फिर से!
स्वप्न जो लेकर चल...
नव वर्षहर्ष नवजीवन उत्कर्ष नव
नव उमंगनव तरंगजीवन का नव प्रसंग
नवल चाहनवल राहजीवन का नव प्रवाह
गीत नवलप्रीति नवलजीवन की रीति नवलजीवन की नीति नवलजीवन की जीत नवल
-हरिवंशराय बच्चन
स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना थाढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों, कोएक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना हैहै अंधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है।
बादलों के अश्रु से धोया गया नभनील नीलमका बनाया था गया मधुपात्र मनमोहक, मनोरमप्रथम ऊषा की किरण की लालिमासी लाल मदिराथ...
मैं जीवन में कुछ कर न सका जग में अंधियारा छाया था, मैं ज्वाला ले कर आया था, मैंने जलकर दी आयु बिता, पर जगती का तम हर न सका । मैं जीवन में कुछ कर न सका !
बीता अवसर क्या आएगा, मन जीवन-भर पछताएगा, मरना तो होगा ही मुझको, जब मरना था तब मर न सका । मैं जीवन में ...