रहीम साहित्य | Collections

Author's Selected Works & Collections

कुल रचनाएँ: 2

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रहीम के दोहे

(1)
एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥
(2)
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन। लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥
(3)
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम। सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥
(4)
गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया।जैसे कुल की कुल वधू पर घर ...

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रहीम के दोहे - 2

(21)
बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥
(22)
मन मोती अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय।फट जाये तो ना मिले, कोटिन करो उपाय॥
(23)
वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।बाँटनवारे को लगै, ज्यौं मेंहदी को रंग॥
(24)
रहिमह ओछे नरन सो, बैर भली ना प्रीत।काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँ...

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रहीम का जीवन परिचय