राजगोपाल सिंह | Profile & Collections
राजगोपाल सिंह का जन्म 1 जुलाई 1947 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले में हुआ।
आपकी रचनाओं में परिवारिक संबंधों की संवेदना और प्रकृति प्रेम विशेषत: देखने को मिलते हैं।
आपके दोहों व गीतों में कहीं 'बाबुल' का उल्लेख है तो कहीं 'फ़सल'! यदि दोहों पर ध्यान दें तो राजगोपाल जी कहीं महानगर के अशांत जीवन पर व्यंगबाण छोड़ते दिखते है:
'अद्भुत है, अनमोल है, महानगर की भोर
रोज़ जगाए है हमें, कान फोड़ता शोर'
तो कहीं रोटी की खातिर इनसान कैसे जीवन निर्थक बना लेता है कि ओर भी ध्यान दिलाते है:
'रोटी-रोज़ी में हुई, सारी उम्र तमाम
कस्तूरी लम्हे हुए, बिना-मोल निलाम'
आपके तरन्नुम भरे दोहे और गीत श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
आपके अनेक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और अब तो आपकी ऑडियो सी डी उपलब्ध हैं।