चंद्रधर शर्मा गुलेरी साहित्य | Collections

Author's Selected Works & Collections

कुल रचनाएँ: 15

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गालियां

एक गांव में बारात जीमने बैठी । उस समय स्त्रियां समधियों को गालियां गाती हैं, पर गालियां न गाई जाती देख नागरिक सुधारक बाराती को बड़ा हर्ष हुआ । वहग्राम के एक वृद्ध से कह बैठा, "बड़ी खुशी की बात है कि आपके यहाँ इतनीतरक्की हो गई है।"
बुड्डा बोला, "हाँ साहब, तरक्की हो रही है । पहले गलियों में कहा जा...

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भूगोल | लघु-कथा

एक शिक्षक को अपने इंस्पेक्टर के दौरे का भय हुआ और वह क्लास को भूगोल रटाने लगा। कहने लगा कि पृथ्वी गोल है । यदि इंस्पेक्टर पूछे कि पृथ्वी का आकार कैसा है और तुम्हें याद न हो तो मैं सुंघनी की डिबिया दिखाऊंगा, उसे देखकर उत्तर देना। गुरु जी की डिबिया गोल थी ।
इंस्पेक्टर ने आकर वही प्रश्न एक विद्यार्...

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पाठशाला

एक पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी के कोल्हू की तरह दिखाया जा रहा था। उसका मुंह पीला था, आँखें सफेद थीं, दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी। प्रश्न पूछे जा रहे थे। उनका वह उत्त...

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बन्दर | लघुकथा

प्रेत समुद्र के पास किसी नगर के वासी बड़े विलासी और आलसी थे और परमेश्वर ने उन्हें धर्मोपदेश करने को, हजरत मूसा को भेजा। मूसा ने बड़ी गम्भीरता से उन्हें अपने सिद्धान्त समझाए और धर्मोपदेश दिया। उन महाशयों ने मूसा की ओर मुंह चिढ़ाया और उसके भाषण को सुनकर जंभाड्यां लीं और दांत निकालकर मूसा को स्पष्ट ...

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उसने कहा था

(एक)बडे-बडे शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की जवान के कोड़ो से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गये हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बम्बूकार्ट वालों की बोली का मरहम लगायें। जब बडे़-बडे़ शहरों की चौड़ी सड़कों पर घोड़े की पीठ चाबुक से धुनते हुए, इक्केवाले कभी घोड़े की नानी से अपना निकट-सम्बन्ध ...

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पाठशाला | चंद्रधर शर्मा गुलेरी

एक पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी के कोल्हू की तरह दिखाया जा रहा था। उसका मुंह पीला था, आँखें सफेद थीं, दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी। प्रश्न पूछे जा रहे थे। उनका वह उत्त...

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कछुआ-धरम | निबंध



'मनुस्मृति' में कहा गया है कि जहाँ गुरु की निंदा या असत्कथा हो रही हो वहाँ पर भले आदमी को चाहिए कि कान बंद कर ले या कहीं उठकर चला जाए। यह हिंदुओं के या हिंदुस्तानी सभ्यता के कछुआ धरम का आदर्श है। ध्यान रहे कि मनु महाराज ने न सुनने जोग गुरु की कलंक-कथा के सुनने के पाप से बचने के दो ही उप...

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सोऽहम् | कविता

करके हम भी बी० ए० पास           हैं अब जिलाधीश के दास ।पाते हैं दो बार पचास           बढ़ने की रखते हैं आस ॥१॥
खुश हैं मेरे साहिब मुझ पर           मैं जाता हूँ नित उनके घर ।मुफ्त कई सरकारी नौकर   ...

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सुनीति | कविता

निज गौरव को जान आत्मआदर का करना निजता की की पहिचान, आत्मसंयम पर चलना ये ही तीनो उच्च शक्ति, वैभव दिलवाते, जीवन किन्तु न डाल शक्ति वैभव के खाते । (आ जाते ये सदा आप ही बिना बुलाए ।) चतुराई की परख यहाँ-परिणाम न गिनकर, जीवन को नि:शक चलाना सत्य धर्म पर, जो जीवन का मन्त्र उसी हर निर्भय चलना, उचित उचित ...

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चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लघु कथाएं

चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' को उनकी कहानी, 'उसने कहा था' के लिए जाना जाता है। गुलेरी ने कुछ लघु-कथाएं भी लिखी जिन्हें हम यहाँ संकलित कर रहे हैं:


पाठशाला
गालियां
भूगोल
चोरों की दाड़ी में तिनके
दूध के पैगम्बर


यदि आपके पास गुलेरीजी की अन्य लघु-कथाएं उपलब्ध हों तो कृपया हमसे साझा करें।
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हीरे का हीरा

[ अधिकतर पाठक गुलेरी जी की तीन कहानियों से परिचित हैं जिनमें 'उसने कहा था', 'बुद्धू का काँटा' व 'सुखमय जीवन' सम्मिलित हैं लेकिन कहा जाता है कि 'हीरे का हीरा' कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी की 'उसने कहा था' का अगला भाग है जिसमें 'लहनासिंह की वापसी दिखाई गई है। इस कहानी के मूल रचनाकार गुलेरीजी ही हैं इ...

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झुकी कमान

आए प्रचंड रिपु, शब्द सुना उन्हीं का,भेजी सभी जगह एक झुकी कमान। ज्यों युद्ध चिह्न समझे सब लोग धाये,त्यों साथ थी कह रही यह व्योम वाणी॥"सुना नहीं क्या रणशंखनाद ?चलो पके खेत किसान! छोड़ो।पक्षी उन्हें खांय, तुम्हें पड़ा क्या?भाले भिड़ाओ, अब खड्ग खोलो। हवा इन्हें साफ़ किया करैगी,-लो शस्त्र, हो लाल न दे...

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बुद्धू का काँटा

रघुनाथ प् प् प्रसाद त् त् त्रिवेदी - या रुग्‍नात् पर्शाद तिर्वेदी - यह क्‍या?
क्‍या करें, दुविधा में जान हैं। एक ओर तो हिंदी का यह गौरवपूर्ण दावा है कि इसमें जैसा बोला जाता है वैसा लिखा जाता है और जैसा लिखा जाता है वैसा ही बोला जाता है। दूसरी ओर हिंदी के कर्णधारों का अविगत शिष्‍ट...

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सुखमय जीवन

परीक्षा देने के पीछे और उसके फल निकलने के पहले दिन किस बुरी तरह बीतते हैं, यह उन्हीं को मालूम है जिन्हें उन्हें गिनने का अनुभव हुआ है। सुबह उठते ही परीक्षा से आज तक कितने दिन गए, यह गिनते हैं और फिर 'कहावती आठ हफ्ते' में कितने दिन घटते हैं, यह गिनते हैं। कभी-कभी उन आठ हफ्तों पर कितने दिन चढ़ गए, ...

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भारत की जय | कविता

हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, क्रिस्ती, मुसलमानपारसीक, यहूदी और ब्राह्मनभारत के सब पुत्र, परस्पर रहो मित्ररखो चित्ते गणना सामानमिलो सब भारत संतानएक तन एक प्राणगाओ भारत का यशोगान
--चंद्रधर शर्मा गुलेरी

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चंद्रधर शर्मा गुलेरी का जीवन परिचय